
Jaydeep gaud filed a consumer case on 26 Jun 2015 against Up Aavasan Aaukt, RHB in the Kota Consumer Court. The case no is CC/187/2005 and the judgment uploaded on 16 Jul 2015.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष, मंच, झालावाड केम्प कोटा ( राजस्थान )
पीठासीनः- अध्यक्ष, श्री नंदलाल शर्मा, मेम्बर श्री महावीर तंवर
परिवाद संख्या:- 187/05
जयदीप गौड पुत्र आर एस गौड निवासी 575, गौरधनपुरा, कोटा। परिवादी
बनाम
01. राजस्थान आवासन मंडल द्वारा आवासन आयुक्त कार्यालय, जयपुर।
02. उपायुक्त, राजस्थान आवासन मंडल सी ए डी सर्किल कोटा। अप्रार्थीगण
प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986
उपस्थिति:-
01. श्री कल्पित शर्मा, अधिवक्ता, परिवादी की ओर से ।
02. श्री संदीप जैन, अधिवक्ता, अप्रार्थीगण की ओर से।
निर्णय दिनांक 26.06.2015
परिवादी का यह परिवाद जिला मंच कोटा से स्थानान्तरण होकर वास्ते निस्तारण जिला मंच, झालावाड, केम्प कोटा को प्राप्त हुआ, जिसमें अंकित किया कि उसने अप्रार्थी सं. 1 के द्वारा कुन्हाडी आवासन योजना के अन्तर्गत निर्मित एम आई जी बी श्रेणी के 25ग50 फुट के निर्मित ढाचों के आवाटन के लिये आवेदन पत्र 30 प्रतिशत राशि की छूट पर आमंत्रित किये थे। परिवादी ने 25ग50 फुट के 1-एफ-13 के ढाचंे के लिये दिनांक 11.07.03 को निर्धारित आवेदन पत्र के साथ 10,000/- रूपये का डी डी सं. 179697 का भुगतान अप्रार्थी सं. 2 को किया। उक्त आवंटन लाटरी के द्वारा किया जाना था। दिनांक 09.07.03 को लाटरी निकाली गई। परिवादी अप्रार्थीसं. 2 के कार्यालय में दिनांक 10.07.03 को उक्त आवंटन के बारे में जानकारी की तो जानकारी लाटरी के दस्तावेजात नहीं होने के कारण देने में असमर्थता जताई और कहा कि यदि मकान आपके नाम आवंटन हो गया होगा तो उसकी सूचना आपके पते पर भिजवा देगे और यदि आपके नाम पर आवंटन नहीं हुआ तो आपके द्वारा जमा राशि वापस लौटा दी जावेगी। अप्रार्थीगण ने परिवादी को न तो उक्त ढांचे का आवंटन किया और ना ही परिवादी द्वारा आवेदन के साथ 10,000/- रूपये की राशि अदा की, उसका भुगतान किया, अप्रार्थीगण ने परिवादी को ढंाचे का आवंटन न कर या उसकी जमानत राशि को अदा न कर उसकी सेवामें कमी की है, इसलिये परिवादी को अप्रार्थीगण से उक्त ढांचा या जमा की गई राशि मय ब्याज, मानसिक क्षति, परिवाद खर्च दिलवाया जावे।
अप्रार्थी ने परिवादी के परिवाद का विरोध करते हुये जवाब पेश किया उसमें अंकित किया कि उनके द्वारा जो योजना दी गई थी उसमें परिवादी द्वारा दो आवासों का विकल्प दिया गया था और प्रत्येक आवास के लिये प्रक्रिया के तहत आवंटन की कार्यवाही की जानी थी। दिनांक 09.07.03 को राजस्थान आवासन मंडल द्वारा आवास संख्या 1 एफ-13 कुन्हाडी, कोटा के सफल आवेदक में परिवादी को घोषित करते हुये इस संबंध में एक सूचना राजस्थान आवासन मंडल कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई थी। परिवादी ने कभी कोई जानकारी प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया। परिवादी के पक्ष में दिनांक 25.07.03 को आवंटित आवास का आवंटन किया गया, जिसके तहत मांग की गई राशि एक माह में जमा कराना था। परिवादी को अप्रार्थीगण ने दिनांक 17.12.03 को रकम की अदायगी एवं कब्जा प्राप्त करने के लिये आवश्यक दस्तावेजात प्रस्तुत करने का नोटिस दिया गया था। परिवादी ने उक्त दस्तावेजात व राशि अदा नहीं की तो परिवादी का आवंटन निरस्त कर परिवादी के द्वारा जमा कराई गई राशि दस हजार रूपये दिनांक 18.03.2004 को जप्त करने का आदेश दिया गया। अप्रार्थीगण द्वारा परिवादी को कोई आश्वासन नहीं दिया गया । परिवादी ने आवासन मंडल को कोई पत्र नहीं दिया। परिवादी को उसके पक्ष में किये गये आवंटन के रद्द करने के बाद, उक्त ढांचे को प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं है। परिवादी ने परिवाद गलत तथ्यों पर आधारित पेश किया है। दिनांक 17.06.04 को परिवादी को आवंटित किया गया ढांचा निरस्त होने के कारण श्री ललित कुमार आरोडा के पक्ष में आवंटित कर दिया गया, जिसका मांग पत्र दिनांक 24.06.04 को जारी किया गया, उनके द्वारा समय पर राशि जमा नहीं किये जाने के कारण उनका आवंटन भी निरस्त कर दिया गया है। उक्त आवास को खुली बिक्री 2005 में शामिल कर लिया, जिसके आवटन के आवेदन पत्र प्राप्त हो चुके है। अप्रार्थीगण ने उक्त आवास के आवंटन एवं निरस्त की कार्यवाही नियमानुसार कर, परिवादी की सेवा में कोई कमी नहीं की है। परिवादी का परिवाद मय हर्जा खर्चा खारिज किया जावे।
उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर बिन्दुवार हमारा निर्णय निम्न प्रकार हैः-
01. आया परिवादी अप्रार्थीगण का उपभोक्ता है ?
परिवादी के परिवाद, शपथ-पत्र, परिवादी का आवेदन तथा डी डी की फोटो कापी, अप्रार्थी के जवाब से परिवादी, अप्रार्थीगण का उपभोक्ता है।
02. आया अप्रार्थीगण ने सेवा दोष किया है ?
उभय पक्षों को सुनने, पत्रावाली में उपलब्ध रेकार्ड का अध्य्यन अवलोकन करने से यह स्पष्ट है कि परिवादी ने अप्रार्थी सं. 1 के द्वारा कुन्हाडी आवासन योजना के अन्तर्गत निर्मित एम आई जी बी श्रेणी के 25ग50 फुट के निर्मित ढाचे 1-एफ-13 के आवाटन 30 प्रतिशत राशि की छूट के लिये दिनांक 11.07.03 को निर्धारित आवेदन पत्र के साथ 10,000/- रूपये का डी डी सं. 179697 का भुगतान अप्रार्थी सं. 2 को किया था, उक्त कथन अप्रार्थीगण स्वीकार करते है तथा उक्त प्रार्थना पत्र के आधार पर दिनांक 09.07.03 को राजस्थान आवासन मंडल द्वारा आवास संख्या 1 एफ-13 कुन्हाडी, कोटा के सफल आवेदक में परिवादी को घोषित करते हुये इस संबंध में एक सूचना राजस्थान आवासन मंडल कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करना, परिवादी के पक्ष में दिनांक 25.07.03 को आवंटित आवास का आवंटन करना, जिसके तहत मांग की गई राशि एवं कब्जा संभालने के लिए आवश्यक दस्तावेजात भी एक माह में अर्थात् दिनांक 17.12.03 तक जमा कराना, परिवादी को अप्रार्थीगण ने दिनांक 17.12.03 को रकम की अदायगी एवं कब्जा प्राप्त करने के लिये आवश्यक दस्तावेजात प्रस्तुत करने का नोटिस देना, परिवादी के उक्त दस्तावेजात व राशि अदा नहीं करने पर परिवादी का आवंटन निरस्त कर, परिवादी के द्वारा जमा कराई गई राशि दस हजार रूपये दिनांक 18.03.2004 को जप्त करने का कथन अप्रार्थीगण ने अपने जवाब में किया है। परन्तु अप्रार्थीगण ने परिवादी के पक्ष में एम आई जी बी श्रेणी के 25ग50 फुट के निर्मित ढाचे 1-एफ-13 के आवाटन व मांग की राशि तथा कब्जा प्राप्त करने के लिये आवश्यक दस्तावेजात जमा एक माह में करने का पत्र, परिवादी को अप्रार्थी द्वारा उक्त संबंध में दिया गया नोटिस, परिवादी द्वारा समय पर उसके द्वारा मांग की गई राशि एवं कब्जा प्राप्त करने के लिये आवश्यक दस्तावेजात प्रस्तुत नहीं करने के कारण उसका आवंटन निरस्त करने के संबंध में की गई कार्यवाहीयों का कोई ब्यौरा एवं लिखित दस्तावेजात जो भी अप्रार्थीगण ने संधारित किये उनको अप्रार्थीगण ने मंच में पेश नहीं किये है, जिससे अप्रार्थीगण ने परिवादी के विवादित ढांचे के आवंटन एवं निरस्त के संबंध में जो कार्यवाही की है, वह प्रमाणित नहीं होने के कारण विश्वसनीय प्रतीत नहीं होती है। अप्रार्थीगण ने परिवादी के ढांचे के आवंटन की सूचना देना, उसको निरस्त करना, परिवादी द्वारा जमानत राशि दस हजार रूपये जमा कराई उसको जप्त करना, अप्रार्थीगण द्वारा परिवादी की सेवा में कमी को दर्शाता है और इतना ही नहीं परिवादी ने जब आंवटित मकान की सूचना प्राप्त करने के लिये दिनांक 07.11.03, 12.12.03 व दिनांक 06.01.04 के पत्रों द्वारा सूचना चाही गई थी फिर भी अप्रार्थीगण ने परिवादी को इसका कोई जवाब नहीं भेजा, इससे परिवादी का भुलावे में पडना स्वभाविक है। परन्तु नोटिस बोर्ड पर जो सूचना चस्पा की, उसको आफिस जाकर नहीं देखना, परिवादी ने अपनी सक्रियता जाहिर नहीं की और अप्रार्थीगण द्वारा परिवादी को उक्तांिकत स्मरण-पत्र का जवाब नहीं देना, अप्रार्थीगण की लापरवाही व सेवा दोष है।
इतना ही नही जब परिवादी को इन पत्रों की कोई सूचना नहीं दी, तो सूचना के अधिकार के तहत परिवादी ने सूचना चाही तो, दिनांक 22.11.11 के पत्र में बिन्दु संख्या 1 में अंकित किया कि - आवास संख्या 1-एफ-13 श्रीमती उषा पंवार को 28.02.2000 को आवंटित कर दिया गया था और दिनांक 19.9.2000 को पंजीयन प्रपत्र जारी कर दिया है, इससे यह तो साबित हुआ कि उस समय विवादित मकान खाली ही नहीं था। परन्तु इसके रिबटल में अप्रार्थीगण ने दिनांक 10.06.15 को पत्र जारी किया, जिसकी फोटो प्रति मंच में पेश की, इसमें अंकित है बिन्दुं संख्या 1 में दी गई सूचना सहवन से त्रुटिवश भेज दी गई, उसे वापस लिया जाता है और बिन्दु संख्या 2 से 6 यथावत रहेगी। यद्यपि विवादित मकान परिवादी के नाम आवंटन होने के बाद, निर्धारित समय में अप्रार्थीगण को वांछित दस्तावेजात जमा नही करने के कारण, परिवादी का आवंटन चाहे निरस्त कर दिया हो, परन्तु परिवादी द्वारा जारी किये गये पत्रो का जवाब अप्रार्थीगण द्वारा नही देना और सूचना के अधिकार के तहत गलत सूचना जारी किया जाना और उसे फिर दुरूस्त करना, यह सभी अप्रार्थीगण का सेवादोष इस हद तक पाया जाता है कि परिवादी द्वारा अप्रार्थीगण को जो 10,000/- रूपये की राशि जमा की है वह राशि परिवादी को वापस लौटाई जावे।
आवंटन के संबंध में अप्रार्थीगण का कोई सेवा दोष प्रमाणित नहीं पाया जाता है।
03. अनुतोष ?
परिवादी जयदीप गौड का परिवाद अप्रार्थीगण के खिलाफ संयुक्ततः अथवा पृथकतः आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है।
आदेश
परिवादी जयदीप गौड का परिवाद अप्रार्थीगण के खिलाफ संयुक्ततः अथवा पृथकतः आंश्किा रूप से स्वीकार किया जाता है कि:-
01. अप्रार्थीगण संयुक्ततः अथवा पृथकतः परिवादी को उसकी जमानत की राशि 10,000/- रूपये अक्षरे दस हजार रूपये तथा इस राशि पर दिनांक 11.07.03 से ता आदयगी संपूर्ण भुगतान 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज अदा करेगे
02. अप्रार्थीगण संयुक्ततः अथवा पृथकतः परिवादी को 5,000/- रूपये ,अक्षरे पांच हजार रूपये मानसिक क्षति के, 5,000/- रूपये, अक्षरे पांच हजार रूपये परिवाद खर्च के अदा करे।
03. अप्रार्थीगण संयुक्ततः अथवा पृथकतः आदेश की पालना निर्णय के दिनांक से एक माह के अंदर करें ।
(महावीर तंवर) (नंदलाल शर्मा)
सदस्य अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष
मंच,झालावाड केम्प कोटा मंच, झालावाड, केम्प कोटा।
निर्णय आज दिनांक 26.06.2015 को खुले मंच में लिखाया जाकर सुनाया गया।
सदस्य अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष
मंच,झालावाड केम्प कोटा मंच, झालावाड, केम्प कोटा।
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