(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।
अपील संख्या- 854/2019
(जिला उपभोक्ता आयोग, महोबा द्वारा परिवाद संख्या- 144/2014 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 24-04-2019 के विरूद्ध)
यूनीवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंश कम्पनी लि0, यूनिट नं० 401 फोर्थ फ्लोर, संगम काम्पलेक्स, 127 अंधेरी कुर्ला रोड, अंधेरी (ईस्ट) मुम्बई इट्स मैनेजर।
बनाम
1- श्रीमती यशोदा उर्फ जशोदा पत्नी स्व0 राम प्रसाद, निवासी- वार्ड नं०10 नियर बस स्टेशन कस्बा व तहसील कुलपहाड़ जनपद महोबा यू०पी०
2- इलाहाबाद बैंक कुलपहाड़ जिला महोबा यू०पी० द्वारा सीनियर ब्रांच मैनेजर।
समक्ष :-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य
उपस्थिति-
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित- विद्वान अधिवक्ता श्री संजय जायसवाल
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित- विद्वान अधिवक्ता श्री साकेत श्रीवास्तव
दिनांक : 15-09-2022
मा0 सदस्य श्री सुशील कुमार, द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी, यूनीवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंश कम्पनी लि0, द्वारा विद्वान जिला आयोग, महोबा द्वारा परिवाद संख्या- 144/2014 श्रीमती यशोदा उर्फ जशोदा बनाम प्रबन्धक इलाहाबाद बैंक, शाखा कुलपहाड़ जिला महोबा उ०प्र० में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 24-04-2019 के विरूद्ध इस आयोग के समक्ष योजित की गयी है।
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विद्वान जिला आयोग द्वारा परिवादिनी को उसके स्व० पति की दुर्घटना मुत्यु के फलस्वरूप के०सी०सी० कार्ड धारक कृषक हेतु जारी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ देने के लिए अंकन 50,000/-रू० अदा करने के लिए बीमा कम्पनी को आदेशित किया है। इस राशि पर 07 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज तथा मानसिक प्रताड़ना के मद में 5000/-रू० एवं वाद व्यय हेतु 3000/-रू० भी विपक्षी संख्या-2 बीमा कम्पनी द्वारा अदा किये जाने हेतु आदेशित किया गया है।
इस निर्णय एवं आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गयी है कि जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णय पारित करते समय अवैधानिकता कारित की है। न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया है। परिवाद केवल बैंक के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया था, अपीलार्थी के विरूद्ध कोई अनुतोष नहीं मांगा गया है। बीमा कम्पनी के समक्ष कभी-भी वांछित दस्तावेज के साथ बीमा क्लेम प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए बीमा कम्पनी उत्तरदायी नहीं है।
हमने दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का परिशीलन किया।
हमने विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश का भी अवलोकन किया।
परिवादिनी के पति एक कृषक थे जिन्होंने विपक्षी संख्या-1 इलाहाबाद बैंक शाखा कुलपहाड जिला महोबा के यहॉं अपनी भूमि बंधक रखकर 3,50,000/-रू० का किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था जिसके अन्तर्गत 50,000/-रू० का दुर्घटना बीमा बैंक द्वारा करवाया गया था। दिनांक 05-01-2014 को परिवादिनी के पति अपने खेत में पानी लगाकर घर आ रहे थे तभी अचानक क्रेन से टक्कर होने के कारण परिवादिनी के पति की
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मृत्यु हो गयी। दुर्घटना की सूचना थाना प्रभारी को दी गयी जिस पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गयी। उसके पति का पंचनामा कराया गया तथा मृत्यु रिपोर्ट प्राप्त हुयी थी। दुर्घटना की मौखिक सूचना दिनांक 12-01-2014 को एवं लिखित सूचना दिनांक 25-01-2014 को बीमा कम्पनी को दी गयी तथा बीमा क्लेम प्राप्त कराए जाने की प्रार्थना की गयी।
विपक्षी बीमा कम्पनी को यह तथ्य स्वीकार है कि परिवादिनी के पति द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया गया था और 50,000/-रू० का दुर्घटना बीमा कराया गया था। मृत्यु की तिथि पर बीमा वैध होने का उल्लेख किया गया है। प्रीमियम का भुगतान होने का भी उल्लेख किया गया है। परन्तु कथन किया गया है कि बैंक द्वारा अपनी सेवा में कोई कमी नहीं की गयी है। बीमा क्लेम बीमा कम्पनी को भेज दिया गया था।
बीमा कम्पनी का यह कथन है वारिश प्रमाण-पत्र तथा दस्तावेज आदि प्रस्तुत किये जाने थे परन्तु परिवादिनी द्वारा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये गये इसलिए बीमा कम्पनी द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गयी है। परन्तु चॅूकि किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अन्तर्गत किसान की मृत्यु होने पर बीमा की व्यवस्था एक सामाजिक यथार्थ अथवा विधायन है। इस विधायन का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। किसी तकनीकी आधार पर बीमा क्लेम नकारना उचित नहीं है। इसलिए विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश में हम कोई अवैधानिकता नहीं पाते हैं, जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश विधि सम्मत है तथा किसी हस्तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं हैं, तदनुसार प्रस्तुत अपील निरस्त किये जाने योग्य है।
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आदेश
प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है। विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 24-04-2019 की पुष्टि की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (सुशील कुमार)
अध्यक्ष सदस्य
कृष्णा,आशु0 कोर्ट न0-1