Chhattisgarh

Korba

CC/14/50

Ram Ratan Sahu - Complainant(s)

Versus

Pankush Alag And Other - Opp.Party(s)

Shri K.B.Shandilya

24 Apr 2015

ORDER

जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोषण फोरम, कोरबा (छ0ग0)

                                              प्रकरण क्रमांक:- CC/14/50

                                                  प्रस्‍तुति दिनांक:- 04/07/2014

समक्ष:- छबिलाल पटेल, अध्‍यक्ष,

       श्रीमती अंजू गबेल, सदस्‍य,

       श्री राजेन्‍द्र प्रसाद पाण्‍डेय, सदस्‍य

 

राम रतन साहू, उम्र-43 वर्ष,

आत्‍मज स्‍व. मिलू राम साहू,

पता- अयोध्‍यापुरी, जैलगॉंव चौक दर्री,

तहसील-कटघोरा, जिला–कोरबा (छ.ग.).................................................आवेदक/परिवादी

 

विरूद्ध

 

  1. पंकुश अलग, पिता-नामालूम, उम्र- 32 वर्ष,

अभिकर्ता-रॉयल सुंदरम एलाएंस इंश्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड,

पता-महेन्‍द्रा एंड महेन्‍द्रा फाइनेंस, गायत्री मंदिर के पास,

टी.पी. नगर कोरबा, तहसील व जिला-कोरबा (छ.ग.)

 

  1. शाखा प्रबंधक,

रॉयल सुंदरम एलाएंस इंश्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड,

शाखा कार्यालय-पल्‍स रोड, रामा ट्रेड सेंटर, राजीव प्‍लाजा,

पुराना बस स्‍टैण्‍ड के पास, बिलासपुर, जिला-बिलासपुर (छ.ग.)

 

  1. रॉयल सुंदरम एलाएंस इंश्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड,

कार्यालय-सुंदरम टावर्स 45 एवं 46, वाइटेस रोड,

चेन्‍नई-600014………………………………………..............अनावेदकगण /विरोधीपक्षकारगण

 

 

            आवेदक द्वारा श्री शरद कारके अधिवक्‍ता।

            अनावेदक क्रमांक 01 अनुपस्थित। पूर्व से एकपक्षीय।

अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 द्वारा श्री आर.एन. राठौर अधिवक्‍ता।

 

 

आदेश

(आज दिनांक 24/04/2015 को पारित)

 

01.         परिवादी/आवेदक राम रतन साहू के स्‍वामित्‍व के स्‍कार्पियो वाहन की बीमा अवधि में दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाने के बाद भी अनावेदकगण के द्वारा वाहन मरम्‍मत की राशि 3,70,000/-रू0 का भुगतान नहीं कर व्‍यवसायिक कदाचरण करते हुए सेवा में कमी किये जाने के कारण वाहन के मरम्‍मत में खर्च की गयी राशि सहित, आर्थिक क्षति 50,000/-रू0 मानसिक, क्षतिपूर्ति 20,000/-रू0 एवं अन्‍य व्‍यय की राशि दिलाये जाने हेतु, यह परिवाद पत्र धारा 12 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत प्रस्‍तुत किया गया है।

 

02.         परिवादी/आवेदक का परिवाद-पत्र संक्षेप में इस प्रकार है कि आवेदक के स्‍वामित्‍व एवं आधिपत्‍य के वाहन स्‍कार्पियों पंजीयन क्रमांक सीजी-12-एजी 0145 का बीमा दिनांक 29/03/2013 से दिनांक 28/03/2014 की अवधि के लिए कोरबा में अनावेदक क्रमांक 01 पंकुस अलग जो कि अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के अभिकर्ता है, के माध्‍यम से करवाया गया था। आवेदक के उक्‍त वाहन की दिनांक 24/05/2013 को दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाने पर उसकी मौखिक सूचना मोबाईल फोन के माध्‍यम से अनावेदकगण को दी गयी। उक्‍त दुर्घटना की सूचना मिलने पर अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के द्वारा उनके अधिनस्‍थ सर्वेयर मयंक द्धिवेदी को नियुक्‍त किये जाने पर उसके द्वारा मौके पर दुर्घटनाग्रस्‍त वाहन का निरीक्षण किया गया था और आवेदक से उक्‍त सर्वेयर के द्वारा कागजातों में हस्‍ताक्षर करवाने के बाद आवेदक को बताया गया था, कि उक्‍त वाहन की क्‍लेम राशि जल्‍दी ही दिलवा देंगे। अनावेदक क्रमांक 01 के द्वारा भी आवेदक को 02 माह के भीतर क्‍लेम राशि मिल जाने का आश्‍वासन दिया गया था। आवेदक के द्वारा उपरोक्‍त क्षतिग्रस्‍त वाहन की मरम्‍मत करवाए जाने पर लगभग 3,70,000/-रू0 खर्च आया था, जिसके संबंध में दावा प्रपत्र भरकर अनावेदक क्रमांक02 एवं 03 के सर्वेयर को सौप दिया गया था, उसके बाद परिवाद प्रस्‍तुति दिनांक तक अनावेदकगण के कार्यालय में जाकर बीमा दावा राशि की मांग की गयी। इस अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के कर्मचारियों के द्वारा लिखित में आवेदन देने के लिए कहा गया, तब आवेदक के द्वारा लिखित में आवेदन पेश किया गया, किंतु शाखा प्रबधंक के उपलब्‍ध नहीं रहने पर उक्‍त आवेदन की पावती नहीं दी गयी। आवेदक को उसके दावा राशि का भुगतान नहीं करके अनावेदकगण के द्वारा सेवा में कमी की गयी है। इसलिए अधिवक्‍ता के माध्‍यम से पंजीकृत नोटिस भी दिनांक 20/05/2014 को  आवेदक की ओर से प्रेषित किया गया था, किंतु दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया। अत: वाहन मरम्‍मत में आये खर्च की राशि 3,70,000/-रू0 आर्थिक क्षति के रूप में 50,000/-रू0 एवं मानसिक क्षतिपूर्ति की राशि 20,000/-रू0 इस प्रकार कुल 4,40,000/-रू0 की राशि आवेदक को अनावेदकगण से  ब्‍याज सहित दिलायी जावे।   

 

03.         अनावेदक क्रमांक 01 ने उस पर नोटिस तामिली के बाद भी अनुपस्थित रहकर अपने विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही होने दिया है, उसकी ओर से कोई जवाबदावा पेश नहीं है।

     

04.         अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 द्वारा प्रस्‍तुत जवाबदावा संक्षेप में इस प्रकार है कि आवेदक के द्वारा इस परिवाद पत्र में महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों को छिपाते हुए अनुतोष की मांग की गयी है। आवेदक के पक्ष में कोई वाद कारण इस जिला उपभोक्‍ता फोरम के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत उत्‍पन्‍न नहीं हुआ है। आवेदक के द्वारा अपने वाहन के संबंध में बीमा पॉलिसी अनावेदक क्रमांक 02 के बिलासपुर स्थित कार्यालय से प्राप्‍त किया गया है। आवेदक के वाहन की कथित दुर्घटना जांजगीर-चांपा जिला के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत घटित हुई है, इसलिए इस जिला उपभोक्‍ता फोरम को इस परिवाद के सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। अनावेदक क्रमांक 01 इन दोनों अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 का अभिकर्ता नहीं है। इसलिए परिवाद पत्र को निरस्‍त किया जावे। आवेदक से क्षतिग्रस्‍त वाहन के संबंध में मरम्‍मत संबंधी मूल रसीद, ड्रायविंग लायसेंस, वाहन की दुर्घटना के समय किये गये उपयोग की जानकारी की मांग की गयी थी, लेकिन आवेदक ने उक्‍त जानकारी नहीं दी तथा उसके द्वारा बीमा शर्तो का पालन नहीं किया गया और यह परिवाद पत्र समय पूर्व पेश कर दिया गया। इन अनावेदकगणों के द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गयी है। आवेदक के द्वारा इस परिवाद पत्र में दावा बहुत बढ़ाचढ़ाकर दर्शाया गया है। इसलिए भी परिवाद पत्र को निरस्‍त किया जावे।

 

05.         परिवादी/आवेदक की ओर से अपने परिवाद-पत्र के समर्थन में सूची अनुसार दस्‍तावेज तथा स्‍वयं का शपथ-पत्र दिनांक 03/07/2014 का पेश किया गया हैं। अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03  द्वारा जवाबदावा के समर्थन में सूची अनुसार दस्‍तावेज तथा जी. विनय प्रकाश, असिस्‍टेंट मैनेजर, का शपथ-पत्र दिनांक 19/03/2015 का पेश किया गया है। उभय पक्षों द्वारा प्रस्‍तुत दस्‍तावेजों का अवलोकन किया गया।  

 

06.         मुख्‍य विचारणीय प्रश्‍न है कि:-

क्‍या परिवादी/आवेदक द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद-पत्र स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है?

 

07.         आवेदक के द्वारा अपने विवादित वाहन क्रमांक सीजी-12-एजी 0145 के पंजीयन प्रमाण पत्र की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/1 का प्रस्‍तुत किया गया है, उक्‍त वाहन के जप्‍त होने के संबंध में जप्‍ती पत्र की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/13ए से ए/13सी तक पेश किये गये है, जिसके संबंध में न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट प्रथम श्रेणी जांजगीर के द्वारा जारी वाहन सुपुर्द में दिये जाने संबंधी ज्ञापन की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/2 के रूप में प्रस्‍तुत किया गया है। उक्‍त वाहन के बीमा के संबंध में कव्‍हर नोट की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/3ए का प्रस्‍तुत किया गया है। जिससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि आवेदक के वाहन का बीमा अनावेदक क्रमांक 02 के द्वारा दिनांक 29/03/2013 से दिनांक 28/03/2014 तक के लिए किया गया था, उस समय उक्‍त वाहन का वाहन स्‍वामी द्वारा घोषित मूल्‍य 7,45,532/-रू0 था।  

           

08.         अनावेदक बीमा कंपनी की ओर से उक्‍त वाहन की बीमा संबंधी कव्‍हर नोट की फोटोप्रतियां दस्‍तावेज क्रमांक डी/2 एवं डी/2ए तथा बीमा पॉलिसी एवं उसकी शर्ते दस्‍तावेज क्रमांक डी/3 एवं डी/3ए के रूप प्रस्‍तुत किया गया है। उक्‍त वाहन की दुर्घटना होने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक डी/1 एवं डी/1ए को अनावेदक बीमा कंपनी के द्वारा पेश किया गया है। आवेदक के द्वारा उसी प्रथम सूचना रिपोर्ट की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/12ए के रूप में प्रस्‍तुत किया है जिसके अनुसार दुर्घटना दिनांक 24/05/2013 को थाना बिर्रा, जिला-जांजगीर-चांपा के अंतर्गत 12.30 बजे दिन में होना दर्शित है। इस प्रकार यह प्रमाणित होता है कि विवादित वाहन का स्‍वामी आवेदक राम रतन साहू रहा है, तथा उक्‍त वाहन का बीमा अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के द्वारा बीमा दुर्घटना अवधि के लिए किया गया है।

 

09.         आवेदक की ओर से अपने उपरोक्‍त वाहन के वाहन चालक शिव कुमार खाखा की ड्रायविंग लायसेंस की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/4 का प्रस्‍तुत किया गया है, उपरोक्‍त वाहन चालक के संबंध में डॉक्‍टर बी.आर.अंबेडकर स्‍मृति चिकित्‍सालय, रायपुर छ.ग.के द्वारा जारी की गयी मृत्‍यु से संबंधित एम.एल.सी. दिनांक 29/05/2013 की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/14, उक्‍त मृतक के शव पंचनामा की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक ए/15ए एवं ए/15बी, शव परीक्षण हेतु आवेदन पत्र दस्‍तावेज क्रमांक ए/16ए एवं ए/16बी तथा शव परीक्षण प्रतिवेदन दस्‍तावेज क्रमांक ए/17ए से ए/17डी तक का प्रस्‍तुत किया गया है। जिसमें पोस्‍टमार्टम किये जाने के पूर्व छ: दिनों के अंदर आई चोंट के कारण मृत्‍यु होना दर्शित है। इस प्रकार वाहन चालक की ड्रायविंग लायसेंस जो आवेदक ने पेश किये है, उसका खंडन अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 की ओर से नहीं किया गया है।   

           

10.         आवेदक ने अपनी वाहन के दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाने पर उसके मरम्‍मत किये जाने के लिए अतुल मोटर्स रायपुर छ.ग. के द्वारा जारी केश मेमो क्रमांक 677 दिनांक 30/07/2013 का राशि 52,750/-रू0, केश मेमो क्रमांक 682 दिनांक 30/07/2013 का राशि 49,900/-रू0, केश मेमो क्रमांक 687 दिनांक 02/09/2013 का राशि 52,600/-रू0 तथा केश मेमो क्रमांक 688 दिनांक 02/09/2013 का राशि 16,200/-रू0 का प्रस्‍तुत किये है, जो दस्‍तावेज क्रमांक ए/5ए एवं ए/5बी के रूप में है। इसी तरह दस्‍तावेज क्रमांक ए/6 रिटेल इनवाईस 5,200/-रू0 के संबंध में, दस्‍तावेज क्रमांक ए/7 श्‍वेता सर्विसिंग सेंटर का बिल 421/-रू0 के संबंध में है।  

   

11.         आवेदक ने अपनी वाहन के मरम्‍मत के संबंध में आटो सेंटर कोरबा के द्वारा जारी किये गये सर्विस कोटेशन की फोटोप्रतियॉ प्रस्‍तुत किये है, जो दस्‍तावेज क्रमांक ए/8ए, ए/8बी, ए/9, ए/10, ए/11ए से ए/11एफ तक प्रस्‍तुत किये है जिसमें अनुमानित खर्च करीब 6,44,000/-रू0 तथा टैक्‍स करीब 90,000/-रू0 इस प्रकार कुल 7,34,000/-रू0 लगभग खर्च होने का अनुमान दिया जाना प्रतीत होता है। आवेदक ने कुल में दर्शाये अनुसार केश मेमो प्रस्‍तुत किये है, उनसे स्‍पष्‍ट होता है कि 1,77,071/-रू0 आवेदक के द्वारा नगद राशि का भुगतान किया गया है। इसके अलावा अन्‍य कोई रसीदें इस जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत नहीं किया गया है।  

 

12.         आवेदक की ओर से अनावेदक बीमा कंपनी के पास अपने अधिवक्‍ता के माध्‍यम से विधिक नोटिस दिनांक 20/05/2014 का दस्‍तावेज क्रमांक ए/21 को अनावेदक बीमा कंपनी के पास दस्‍तावेज क्रमांक ए/21ए डाक रसीद के द्वारा प्रेषित किया गया था। जिसमें वाहन के मरम्‍मत कराये जाने में करीब 3,70,000/-रू0 खर्च होना दर्शाया गया है तथा उससे संबंधित दस्‍तावेज बीमा कंपनी को क्‍लेम फार्म के साथ सौंप दिया जाना व्‍यक्‍त किया है। उक्‍त नोटिस प्राप्ति के बाद भी जब बीमा कंपनी के द्वारा दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया, तब परिवाद पत्र दिनांक 04/07/2014 को प्रस्‍तुत किया गया है। अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 बीमा कंपनी को आवेदक के परिवाद पत्र के साथ प्रेषित नोटिस के साथ दस्‍तावेजों की प्रतियॉ भी प्रेषित की गयी, लेकिन अनावेदक बीमा कंपनी के द्वारा आवेदक के दावा को स्‍वीकार किये जाने अथवा इंकार किये जाने से संबंधित कोई दस्‍तावेज प्रस्‍तुत नहीं किये गये है।

 

13.         अनावेदक बीमा कपंनी की ओर से तर्क के दौरान बताया गया है कि सर्वे रिपोर्ट की फोटोप्रति दस्‍तावेज क्रमांक डी/4 का प्रस्‍तुत किया गया है। जिसमें दावा प्रमाणित होने पर क्‍लेम की राशि 1,59,973/-रू0 दिया जा सकता है, ऐसा व्‍यक्‍त किया गया है। इसलिए यह भी तर्क किया गया कि परिवाद पत्र को निरस्‍त किया जावे। यह उल्‍लेखनीय है कि उपरोक्‍त सर्वे रिपोर्ट दिनांक 11/02/2015 को सर्वेयर विनीत पटनायक के द्वारा तैयार किया जाना दर्शित है किंतु उक्‍त सर्वेयर का कोई शपथ पत्र प्रस्‍तुत नहीं है, तथा उक्‍त सर्वे रिपोर्ट में उक्‍त दावा राशि के आंकलन के संबंध में कोई आधार विस्‍तृत रूप से दर्शित नहीं है। 

 

14.         आवेदक की ओर से तर्क किया गया है कि परिवाद प्रस्‍तुति के बाद भी अनावेदक बीमा कंपनी के द्वारा आवेदक को दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण उसे आर्थिक एवं मानसिक क्षति भी हुई है,इसलिए परिवाद पत्र को स्‍वीकार करते हुए 4,40,000/-रू0 अनावेदकगण से दिलाये जाने का निवेदन किया गया है।

   

15.         अनावेदक की ओर से तर्क किया गया है कि इस मामले में अनावेदक बीमा कंपनी का कार्यालय कोरबा में नहीं है। आवेदक के पक्ष में बीमा पॉलिसी बिलासपुर स्थित कार्यालय से जारी हुआ है तथा अनावेदक क्रमांक 02 का मुख्‍यालय चेन्‍नई (तमिलनाडू) में है। आवेदक के अनुसार दुर्घटना स्‍थल जांजगीर चांपा जिला में थाना बिर्रा के अंतर्गत स्थित है। इसलिए  इस जिला उपभोक्‍ता फोरम को इस प्रकरण के सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्‍त नहीं है। अत: परिवाद पत्र को निरस्‍त किया जावे।

 

16.         आवेदक की ओर से उपरोक्‍त तर्क का खंडन करते हुए निवेदन किया गया है कि आवेदक के विवादित वाहन का बीमा अनावेदक क्रमांक 01 जो कि अनावेदक क्रमांक 02 का बीमा एजेंट है, उसके द्वारा अपने कोरबा स्थित कार्यालय से किया गया था, जिसके आधार पर बीमा प्रमाण पत्र जारी किया गया है, ऐसी स्थिति में अनावेदक क्रमांक 01 कोरबा जिले में निवासरत होने के कारण ‘‘वाद कारण’’ इस जिला उपभोक्‍ता फोरम के क्षेत्राधिकार में उत्‍पन्‍न हुआ है। अत: इस प्रकरण के सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस जिला उपभोक्‍ता फोरम को है।

 

17.         यह उल्‍लेखनीय है कि धारा 11(2) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधान के अनुसार विरोधी पक्षकार में से एक या एक से अधिक पक्षकार परिवाद संस्थित किये जाने के समय वास्‍तव में और स्‍वेच्‍छा से निवास करता है या कारबार करता है अथवा शाखा कार्यालय है या अभिलाभ के लिए स्‍वयं काम करता है, तब उस क्षेत्र पर अधिकार रखने वाले जिला उपभोक्‍ता फोरम को सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्‍त होना दर्शित है। इसी तरह वाद हेतुक पूर्णत: या भागत: पैदा होने पर भी, उस स्‍थान पर क्षेत्राधिकार रखने वाले उपभोक्‍ता फोरम को सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्‍त होना बताया गया है। अनावेदक की ओर से आवेदक के पक्ष में बीमा प्रमाण पत्र जारी किया गया वह किस बीमा एजेंट के मार्फत एवं कहां से बिलासपुर के कार्यालय को प्राप्‍त हुआ था, इसको प्रमाणित करने के लिए अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 की ओर से कोई साक्ष्‍य पेश नहीं है। अनावेदक क्रमांक 01 ने अनुपस्थित रहकर अपने विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही होने दिया है। अत: उपरोक्‍त सभी परिस्‍थतियों पर विचार करते हुए, यह पाया जाता है कि इस जिला उपभोक्‍ता फोरम को इस मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्‍त है।  

 

18.         इस मामले में आवेदक के बीमित एवं क्षतिग्रस्‍त वाहन के संबंध में मरम्‍मत पर खर्च किये गये राशि की अदायगी अनावेदक बीमा कंपनी की ओर से नहीं की गयी है, उसके दावा प्रपत्र को निरस्‍त करने या स्‍वीकार करने का कोई आदेश अभी तक नहीं दिया जाना बताया गया है। आवेदक के द्वारा परिवाद प्रस्‍तुति दिनांक 04/07/2014 के काफी समय बाद कथित सर्वेयर विनीत पटनायक की सर्वे रिपोर्ट दिनांक 11/02/2015 को इस मामले में दस्‍तावेज क्रमांक डी/4 के रूप में पेश किया गया है, जो विस्‍तृत विवरण सहित नहीं है। इस परिवाद पत्र की नोटिस जारी होने पर आवेदक के दस्‍तावेजों की जो सूची प्रेषित की गयी थी, उसमें वाहन चालक के ड्रायविंग लायसेंस दस्‍तावेज क्रमांक ए/4 की फोटोप्रति भी प्रेषित किया जाना पाया जाता है, ऐसी स्थिति में वाहन चालक जिसकी दुर्घटना में आयी चोंट के कारण बाद में मृत्‍यु हो गयी के पास जो ड्रायविंग लायसेंस था उसकी जानकारी अनावेदक बीमा कंपनी को हो चुकी है। उसके बाद भी आवेदक के दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया है।

 

19.         अत: अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के द्वारा आवेदक के दावा प्रपत्र का निराकरण करने में काफी विलम्‍ब किया गया है, इसलिए अनावेदकगण के द्वारा सेवा में कमी किये जाने का प्रर्याप्‍त साक्ष्‍य उपलब्‍ध होना पाया जाता है, जिसके कारण  आवेदक मानसिक क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्‍त करने का अधिकारी होना भी पाया जाता है।

 

20.         तदनुसार मुख्‍य विचारणीय प्रश्‍न का निष्‍कर्ष ‘’हॉ’’ में दिया जाता है।

 

21.         अत: आवेदक/परिवादी राम रतन साहू की ओर से प्रस्‍तुत इस परिवाद को धारा 12 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत अंशत: स्‍वीकार किये जाने योग्‍य होना पाते हुए, आवेदक के पक्ष में एवं अनावेदकगण के विरूद्ध निम्‍नानुसार अनुतोष प्रदान किया जाता है और आदेश दिया जाता है कि:-

 

  1.    आवेदक को उसके द्वारा अनावेदक क्रमांक 02 के पास प्रस्‍तुत किये गये दावा राशि की भुगतान से संबंधित दावा प्रपत्र का निराकरण उसके द्वारा प्रस्‍तुत दस्‍तावेजों के आधार पर आज से 02 माह के अंदर अनावेदक क्रमांक 02 एवं 03 के द्वारा किया जावे।

 

  1. आवेदक के दावा का निराकरण शीघ्रता से नहीं किये जाने के कारण मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000/-रू. (दस हजार रूपये) अनावेदकगण संयुक्‍त रूप से एवं पृथकत: आवेदक को प्रदान करें।

 

  1.    आवेदक को वाद व्‍यय के रूप में 2,000/- रू. (दो हजार रूपये) अनावेदकगण संयुक्‍त रूप से एवं पृथकत: प्रदान करें।

 

 

     (छबिलाल पटेल)         (श्रीमती अंजू गबेल)       (राजेन्‍द्र प्रसाद पाण्‍डेय)

        अध्‍यक्ष                    सदस्‍य                         सदस्‍य

 

 

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