View 24222 Cases Against National Insurance
Hitendra Bahadur Singh filed a consumer case on 28 Mar 2023 against National Insurance Co. Ltd. in the Barabanki Consumer Court. The case no is 15/14 and the judgment uploaded on 29 Mar 2023.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बाराबंकी।
परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि 19.02.2014
अंतिम सुनवाई की तिथि 20.03.2023
निर्णय उद्घोषित किये जाने के तिथि 28.03.2023
परिवाद संख्याः 15/2014
1. मृतक हितेन्द्र बहादुर सिंह (बालिग) पुत्र बृजेन्द्र बहादुर सिंह उर्फ बाबू सिंह निवासी मकान नं0 पी/794 मोहल्ला
पीरबटावन, बाराबंकी। (वाद के लम्बन काल में)
1/1. जया सिंह बालिग पत्नी यशवीर सिंह पुत्र स्व0 हितेन्द्र बहादुर सिंह
1/2. दुर्गेन्द्र प्रताप सिंह बालिग पुत्र स्व0 हितेन्द्र बहादुर सिंह
1/3. उदय प्रताप सिंह बालिग पुत्र स्व0 हितेन्द्र बहादुर सिंह
द्वारा- श्री पंकज निगम, अधिवक्ता
श्री राम सिंह वर्मा अधिवक्ता
श्री प्रभात कुमार वर्मा, अधिवक्ता
श्री हेमन्त कुमार जैन, अधिवक्ता
बनाम
नेशनल इंश्योरेन्स कम्पनी लि0 शाखा कार्यालय फैजाबाद रोड नाका सतरिख बाराबंकी द्वारा शाखा प्रबंधंक।
द्वारा-श्री विनय जोशी अधिवक्ता
समक्षः-
माननीय श्री संजय खरे, अध्यक्ष
माननीय श्रीमती मीना सिंह, सदस्य
माननीय डॉ0 एस0 के0 त्रिपाठी, सदस्य
उपस्थितः परिवादी की ओर से -श्री पंकज निगम, अधिवक्ता
विपक्षी की ओर से-श्री शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव अधिवक्ता,
श्री अर्जुन कुमार, अधिवक्ता
द्वारा-संजय खरे, अध्यक्ष
निर्णय
परिवादीगण ने विपक्षी नेशनल इंश्योरेन्स कम्पनी के विरूद्व धारा-12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत वाहन् में व्यय रू0 39,993.00 मय अठारह प्रतिशत ब्याज व मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक क्षति के रूप में रू0 20,000.00 तथा परिवाद व्यय व अधिवक्ता फीस रू0 5,000.00 दिलाये जाने हेतु अनुतोष की माँग किया है।
संक्षेप में परिवाद कथानक इस प्रकार है कि परिवादीगण के मृतक पिता वाहन मारूति वैन संख्या यू0 पी0-41डी/7273 के पंजीकृत स्वामी है जिसका बीमा विपक्षी से बीमा पालिसी संख्या-450303/31/12/6100004838 पर कराया था जो दिनांक 08.10.2012 से 07.10.2013 की अवधि के लिये वैध था। उपरोक्त वाहन् बीमा अवधि में दिनांक 23.01.2013 को हैदरगढ़ से बाराबंकी आ रही थी रात्रि लगभग 12.00 बजे अत्यधिक कोहरा पड़ रहा था। परिवादीगण के वाहन् का ड्राईवर मो0 इस्लाम सामान्य गति से वाहन् चला रहा था। आगे एक ट्रक भी बाराबंकी जा रहा था। उक्त ट्रक के चालक ने अचानक अत्यधिक कोहरा होने के कारण ब्रेक मार दिया और बीचोबीच सड़क पर रूक गया। परिवादी का ड्राईवर उक्त ट्रक को देख न सका और पीछे से जाकर ट्रक के खुले डाले में टकरा गया जिससे चालक व परिवादी को मामूली चोटे आई थी। उक्त वाहन् ट्रक से अन्य वाहन चालको की मदद से अलग करते हुये परिवादी ने अपने मित्र के वाहन् से दिनांक 24.01.2013 को सुबह करीब 11.00 बजे दिन में श्री दुर्गा मोटर्स, निगम मार्केट फैजाबाद रोड, बाराबंकी के यहाँ लाकर खड़ा कर दिया। परिवादी ने दुर्घटना की सूचना लिखित रूप से विपक्षी को दी। कम्पनी के एजेन्ट बृजेश कुमार निगम ने उसी समय फार्म भरवाकर परिवादी से हस्ताक्षर करवाकर क्लेम फार्म अपने पास जमा कर लिया। विपक्षी का एक सर्वेयर श्री दुर्गा मोटर्स पर गया और दुर्घटनाग्रस्त वाहन् के फोटोग्राफ लिये तथा औपचारिकतायें पूर्ण करते हुये प्रश्नगत गैराज से स्टीमेट आदि प्राप्त किया। दिनांक 03.12.2013/05.12.2013 को विपक्षी ने एक पत्र परिवादी के यहाँ पंजीकृत डाक से भेजा जो परिवादी को दिनांक 07.12.2013 को प्राप्त हुआ, उक्त पत्र में किसी पत्र दिनांकित 22.05.2013 का उल्लेख किया था जो परिवादी को कभी प्राप्त नहीं हुआ। परिवादी अपने दामाद के साथ विपक्षी के यहाँ गया। परिवादी ने पत्र दिनांकित 22.05.2013 को पढ़ने के उपरान्त विपक्षी से श्री दुर्गा मोटर्स व दिव्या मोटर्स के बिल बाउचर्स असल रिसीव करने के लिये निवेदन किया परन्तु उन्होंने उसे लेने से इन्कार कर दिया। परिवादी के पास उपरोक्त वाहन् का फिटनेस नहीं है जबकि विपक्षी द्वारा वाहन् का पंजीयन देखने के बाद ही बीमा किया गया था। अतः परिवादीगण का परिवाद स्वीकार कर उक्त धनराशि दिलाई जाय। परिवादी की तरफ से परिवाद के समर्थन में साक्ष्य शपथपत्र दिनांक 23.07.2013 दाखिल किया गया है जिसमे वाद कथानक के सभी अभिकथनों को समर्थित किया गया है। परिवादी ने यशबीर सिंह का भी शपथपत्र दाखिल किया है।
दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में परिवादी की तरफ से फेहरिस्त दिनांक 18.02.2014 से सात कागजात फोटोप्रतिलिपि प्रस्तुत किया गया है। (1) फोटोकापी बीमा पालिसी (2) फोटोकापी वाहन् पंजीयन प्रमाण पत्र (3) फोटोकापी स्वास्थता प्रमाण पत्र (4) फोटोकापी दुर्गामोटर के बिल संख्या-1016, 1017, 1018, 1019 (5) फोटोकापी जॉब कार्ड/लेबर मेमो दिनांक 27.02.2013 (6) फोटोकापी दिया मोटर्स का लेबर मेमो (7) फोटोकापी पत्र दिनांक 03.12.2013 व 22.05.2013 दाखिल किया है। परिवादी द्वारा पुनः इन्ही समस्त प्रपत्रों को दाखिल किया गया है।
विपक्षी के तरफ से वादोत्तर दिनांक 10.03.2015 दाखिल किया गया जिसमे बीमा किये जाने के कथन को स्वीकार करते हुये परिवाद पत्र की धारा-1 से 10 तक के कथनों से इंकार किया गया है। विपक्षी द्वारा अतिरिक्त कथन में यह कहा गया है कि बीमा पालिसी संख्या-450303/ 31/12/6100004838 द्वारा परिवादी के वाहन् संख्या यू0 पी0-41 डी-7273 बीमा अवधि दिनांक 08.10.2012 से 07.10.2013 तक पालिसी की नियम शर्तो के अधीन किया गया था। परिवादी की दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर अविलम्ब सर्वे हेतु श्री संतोष कुमार श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया। विपक्षी द्वारा बीमा क्लेम के शीद्य्र निस्तारण हेतु बार-बार प्रपत्र माँगे गये परन्तु परिवादी द्वारा प्रपत्र नहीं उपलब्ध कराया गया। विपक्षी ने परिवादी को रजिस्टर्ड पत्र दिनांक 22.05.2013, 03.12.2013, 02.01.2014, 22.01.2014 प्रेषित किया जिनका उत्तर परिवादी ने नहीं दिया। परिवादी के दुर्घटनाग्रस्त वाहन का फिटनेस वैधता दिनांक 06.01.2011 को समाप्त हो गया थी जबकि कथित दुर्घटना दिनांक 23.01.2013 की है। फिटनेस समाप्त होने की स्थिति में वाहन् सड़क पर नहीं चल सकता। परिवादी से विभिन्न पत्रों से फिटनेस के नवीनीकरण के संबंध में जानकारी चाही गई थी परन्तु उसके द्वारा कोई उत्तर नहीं दिया गया। परिवादी ने मोटरयान अधिनियम 1988 और बीमा पालिसी की Terms & Condition का घोर उल्लघंन किया है। परिवादी द्वारा पूर्व में पत्र द्वारा माँगी गई जानकारी न उपलब्ध कराने की स्थिति में उसके क्लेम को दिनांक 21.02.2014 को नो क्लेम कर दिया गया। परिवादी को कोई क्षति कारित नहीं हुई है। कथित दुर्घटना की कोई प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराई गई है। अतः उक्त समस्त कारणों से परिवाद सव्यय निरस्त किया जाय।
विपक्षी की तरफ से वादोत्तर के समर्थन में शपथपत्र बतौर साक्ष्य दाखिल किया गया है। दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में विपक्षी की तरफ से सूची के माध्यम से दिनांक 08.11.2017 को (1) फोटोकापी बीमा सर्टिफिकेट (2) बीमा पालिसी की टर्मस एंड कन्डीसन्स (3) पंजीयन प्रमाण पत्र वाहन संख्या यू0 पी0 41 डी 7273 (4) फोटोकापी परिवादी को भेजा गया पत्र दिनांक 22.05.2013, 03.12.2013, 02.01.2014, 22.01.2014, 21.01.2014 (5) सर्वेयर रिपोर्ट दिनांक 04.04.2013 दाखिल की गई है।
परिवादी ने अपनी लिखित बहस दाखिल की है।
विपक्षी ने अपनी लिखित बहस दाखिल की है।
उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्ता के तर्को को सुना तथा पत्रावली पर प्रस्तुत किये गये साक्ष्यों/अभिलेखों का गहन परिशीलन किया।
वर्तमान प्रकरण में यह निर्विवाद है कि परिवादी का वाहन संख्या-यू0 पी0-41 डी 7273 आठ सीटर (ड्राइवर सहित) एल एम वी मारूति वैन है। पंजीयन प्रमाण पत्र के अनुसार इस वाहन का पंजीयन दिनांक 17.07.2003 को कराया गया। पंजीयन प्रमाण पत्र में निर्माण का वर्ष 07/2003 अंकित है। पेट्रोल/एल पी जी से चलने वाला वाहन है। वाहन का पंजीयन 15 वर्ष के लिये वैध होता है अर्थात प्रश्नगत वाहन का पंजीयन दिनांक 16.07.2018 तक वैध था।
यह स्वीकृत तथ्य है कि परिवादी का वाहन संख्या-यू0 पी0 41 डी 7273 का दिनांक 23.01.2013 को हैदरगढ़ से बाराबंकी आते समय रात को लगभग बारह बजे अत्यधिक कुहरे के कारण आगे जा रहे ट्रक के अचानक ब्रेक लगाने, कुहरे में दिखाई न देने, पीछे से परिवादी का वाहन ट्रक में टकरा जाने से वाहन दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुआ। परिवादी ने इस दुर्घटना में वाहन को हुई क्षति के संबंध में रू0 39,993/-मय ब्याज माँग की है। परिवादी ने वाहन का बीमा विपक्षी कम्पनी से दिनांक 08.10.2012 से 07.10.2013 की अवधि तक वैध होना अंकित किया है।
विपक्षी बीमा कम्पनी का तर्क है कि दुर्घटना के दिनांक 23.01.2013 को वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र वैध नहीं था। दुर्घटना परिवादी के वाहन चालक की लापरवाही से हुई है अतः बीमा पालिसी की शर्तो का उल्लघंन करने के कारण परिवादी का बीमा क्लेम अस्वीकार कर दिया।
परिवादी की ओर से दाखिल प्रपत्रों में वाहन के पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रति के अवलोकन से विदित है कि वाहन की फिटनेस दिनांक 06.01.2011 तक वैध थी। परिवादी की ओर से दाखिल अन्य फिटनेस प्रमाण पत्र की प्रति के अवलोकन से विदित है कि यह फिटनेस प्रमाण पत्र दिनांक 25.06.2013 से 24.06.2014 तक वैध है। इन दोनो प्रपत्रों के अवलोकन से स्पष्ट है कि परिवादी के वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र दिनांक 07.07.2011 से लेकर 24.06.2013 तक नहीं था। इसी वाहन का बीमा दिनांक 08.10.2012 से 07.10.2013 तक का होना स्वीकृत तथ्य है जो यह सिद्व करता है कि परिवादी के वाहन का बीमा विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा दिनांक 08.10.2012 को जब किया गया तो उस दिन भी परिवादी के वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं था। बीमा कम्पनी ने परिवादी के वाहन का बीमा करते समय फिटनेस प्रमाण पत्र की वैधता नहीं देखी और बीमा कर दिया।
बगैर फिटनेस प्रमाण पत्र के वाहन चलाना परिवादी की त्रुटि है और बगैर फिटनेस प्रमाण पत्र देखे बीमा कर देना विपक्षी बीमा कम्पनी की त्रुटि है। वाहन का बीमा करवाने के लिये परिवादी द्वारा बीमा पालिसी अभिलेख के अनुसार रू0 2,519/-का प्रीमियम अदा किया गया। बीमा पालिसी अभिलेख में वाहन की बीमा की दिनांक पर वाहन का आंकलित मूल्य एल पी जी यूनिट सहित रू0 68,900/-अंकित है। परिवादी के साक्ष्य से दुर्घटना रात्रि के समय अधिक कुहरा होने के कारण घटित होना अंकित है। दुर्घटना में वाहन चालक की कोई लापरवाही का पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं है। घटना के समय कुहरा न होने का कोई साक्ष्य नहीं है। परिवादी द्वारा दुर्घटनाग्रस्त वाहन में हुई क्षति तथा सम्बन्धित पुर्जो के मूल्य तथा उसके बनवाने में आये लेबर चार्ज की रसीदों की प्रतियाँ प्रस्तुत की गई है जिसका कुल योग रू0 39,995/-है। परिवादी ने रू0 39,993/-बतौर क्षतिपूर्ति माँग की है। यह माँगी गई क्षतिपूर्ति बीमा पालिसी में आंकलित वाहन की कुल Value रू0 68,900/-के अंदर है।
उपरोक्त तथ्यों के विवेचन से स्पष्ट है कि दुर्घटना के समय वाहन विपक्षी बीमा कम्पनी नेशनल इंश्योरेन्स से बीमित था। वाहन का बीमा करने की दिनांक 08.10.2012 को भी वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं था। घटना की दिनांक 23.01.2013 को भी फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं था। इस आशय का कोई साक्ष्य पत्रावली पर नहीं है कि दुर्घटना वाहन के फिटनेस में किसी कमी के कारण हुई है। दुर्घटना का मुख्य कारण दिनांक 23.01.2013 को रात्रि 12.00 बजे अत्यधिक कुहरा होने के कारण आगे का वाहन दिखाई न देना और अचानक ब्रेक लगाने के कारण परिवादी का वाहन टकरा जाना है। चूँकि घटना के समय परिवादी की चूक के कारण वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं था साथ ही बीमा करने की दिनांक 08.10.2012 को बीमा कम्पनी ने भी फिटनेस प्रमाण पत्र के होने के संबंध में कोई जानकारी परिवादी से नहीं ली। जबकि बीमा कम्पनी जब परिवादी से प्रीमियम की धनराशि लेकर बीमा कर रही थी तो उसी समय उसे आवश्यक अभिलेखों की जांच कर लेनी चाहिये थी। साथ ही परिवादी का भी यह उत्तरदायित्व था कि वह अपनी गाड़ी का फिटनेस प्रमाण पत्र जांच कराके रखता। दुर्घटना वाहन के फिटनेस की कमी के कारण होना सिद्व नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में दोनो पक्षों की त्रुटियों को दृष्टिगत रखते हुये व बीमा कम्पनी पक्ष ने बीमा करने के लिये प्रीमियम की धनराशि प्राप्त करके लाभार्थी होने के आधार पर क्लेम की धनराशि में परिवादी की चूक/त्रुटि (फिटनेस प्रमाण पत्र न होने) के आधार पर क्लेम की गई क्षतिपूर्ति में से पच्चीस प्रतिशत की धनराशि कम करते हुये तथा बीमा कम्पनी की चूक/त्रुटि (बीमा करते समय फिटनेस प्रमाण पत्र न देखने) को दृष्टिगत रखते हुये क्षतिपूर्ति की धनराशि का पचहत्तर प्रतिशत विपक्षी बीमा कम्पनी से दिलाने का आदेश करना न्यायोचित है।
उपरोक्त के दृष्टिगत विपक्षी ने परिवादी के बीमा क्लेम का भुगतान न करके सेवा में कमी की है।
उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि दुर्घटना में वाहन को जो क्षति हुई है और उसको बनवाने में जो धनराशि परिवादी की व्यय हुई है लगभग उतनी ही धनराशि रू0 39,993/-परिवादी ने परिवाद पत्र में बतौर क्षतिपूर्ति माँगी है। अतः इस क्षतिपूर्ति की धनराशि का पचहत्तर प्रतिशत रू0 29,995/-बतौर क्षतिपूर्ति परिवादी को विपक्षी बीमा कम्पनी से परिवाद दाखिल करने की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान तक छः प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर से दिलाना उचित है। साथ ही परिवादी मानसिक व शारीरिक कष्ट हेतु रू0 3,000/-व वाद व्यय हेतु रू0 2,000/-दिलाया जाना उचित होगा।
उपरोक्त विवेचन के आलोक में वर्तमान परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है।
आदेश
परिवाद संख्या-15/2014 अंशतः स्वीकार किया जाता है। विपक्षी बीमा कम्पनी को निर्देशित किया जाता है कि वह परिवादी को रू0 29,995/- परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि 19.02.2014 से अदायगी की तिथि तक 6% साधारण वार्षिक ब्याज सहित, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति रू0 3,000/-तथा वाद व्यय रू0 2,000/- पैंतालिस दिन में अदा करेगें। पैतालिस दिवस में अनुपालन न करने की स्थिति में आदेशित धनराशि रू0 29,995/-पर अदायगी की तिथि तक 9% की दर से ब्याज देय होगा।
(डॉ0 एस0 के0 त्रिपाठी) (मीना सिंह) (संजय खरे)
सदस्य सदस्य अध्यक्ष
यह निर्णय आज दिनांक को आयोग के अध्यक्ष एंव सदस्य द्वारा खुले न्यायालय में उद्घोषित किया गया।
(डॉ0 एस0 के0 त्रिपाठी) (मीना सिंह) (संजय खरे)
सदस्य सदस्य अध्यक्ष
दिनांक 28.03.2023
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