(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील संख्या-1088/2009
दि ओरियण्टल इंश्योरेंस कंपनी लि0 बनाम मैसर्स दुर्गा क्लाथ स्टोर
दिनांक : 26.09.2024
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या-153/2003, मैसर्स दुर्गा क्लाथ स्टोर बनाम दि ओरियण्टल इंश्योरेंस कंपनी लि0 तथा एक अन्य में विद्वान जिला आयोग, जालौन स्थान उरई द्वारा पारित निर्णय दिनांक 20.5.2009 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई अपील पर अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री बी.सी. पाण्डेय तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री अविनाश कुमार श्रीवास्तव को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/पत्रावली का अवलोकन किया गया।
2. विद्वान जिला आयोग ने बीमित परिसर में चोरी होने के आधार पर अंकन 1,37,167/-रू0 10 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश पारित किया है।
3. परिवाद के तथ्यों के अनुसार परिवादी द्वारा कपड़े की दुकान का बीमा कराया गया था, जिसकी अवधि दिनांक 12.2.1996 से दिनांक 11.2.1997 तक थी। दिनांक 29/30.7.1996 की रात्रि में परिवादी की दुकान में साडि़यों की चोरी ताला तोड़कर कर ली गई, जिसकी शिकायत थाना कोतवाली में अंतर्गत धारा 457/380 आईपीसी के तहत की गई तथा न्यायालय द्वारा आरोप पत्र भी प्रेषित कर दिया गया।
4. बीमा कंपनी का यह कथन है कि यथार्थ में यह भवन स्वामि एवं किरायेदार का विवाद है, जो मुकदमा दर्ज कराया गया था, उसमें आरोपी दोषमुक्त हो चुके हैं और चोरी की कोई घटना साबित नहीं हुई है। दस्तावेज सं0-46 पर अपराध संख्या-449/1998 अंतर्गत धारा 457, 380 आईपीसी, में पारित निर्णय की प्रतिलिपि है, इस निर्णय के अवलोकन से ज्ञात होता है कि दिनांक 29/30.7.1996 को वादी प्रवीण कुमार माहेश्वरी की दुकान में चोरी हो गई। चोरी करने में सीताराम गुप्ता का हाथ है, परन्तु न्यायालय के समक्ष इस संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की गई। अत: स्वंय परिवादी ने न्यायालय में चोरी के समर्थन में कोई बयान नहीं दिया, इसलिए चोरी होने की कहानी के आधार पर बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का आदेश भी नहीं दिया जा सकता, जो व्यक्ति स्वंय न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर चोरी की कहानी का समर्थन नहीं करता, वह बीमा कंपनी से चोरी का क्लेम नहीं मांग सकता। अत: विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश अपास्त होने और प्रस्तुत अपील स्वीकार होने योग्य है।
आदेश
5. प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है। विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 20.05.2009 अपास्त किया जाता है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित अपीलार्थी को यथाशीघ्र विधि के अनुसार वापस की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय) (सुशील कुमार(
सदस्य सदस्य
लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-2