राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
(मौखिक)
अपील संख्या-2325/2011
टोरंट पावर लि0
बनाम
मो0 आजाद पुत्र श्री मो0 शकील
समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री इसार हुसैन,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री आर0के0 मिश्रा,
विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक: 06.12.2024
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील इस न्यायालय के सम्मुख जिला उपभोक्ता आयोग (प्रथम), आगरा द्वारा परिवाद संख्या-498/2011 मो0 आजाद बनाम टोरंट पावर लि0 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 04.11.2011 के विरूद्ध योजित की गयी है।
जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा परिवाद स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया गया:-
''परिवादी का परिवाद इस प्रकार स्वीकार किया जाता है कि राजस्व निर्धारण प्रपत्र दिनांक-16.08.2011 रू070227.50 को निरस्त किया जाता है। और विपक्षी नियमानुसार एक दिन का अनाधिकृत विद्युत प्रयोग का विद्युत मूल्य व बिल दिनांकित 16.08.2011 के अनुसार देयक धनराशि 4175रूपये प्राप्त करने का अधिकारी होगा व परिवादी 4.010 किलोवाट का कनेक्शन आवश्यक औपचारिकतायें पूर्ण करने पर अपने सन्दर्भित सम्पत्ति पर वाद अदायगी उपरोक्त धनराशि विद्युत प्रवाह जारी कराने का भी अधिकारी होगा परिवादी रू.2000वाद व्यय भी विपक्षी से पाने का
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अधिकारी होगा।''
मेरे द्वारा अपीलार्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री इसार हुसैन एवं प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री आर0के0 मिश्रा को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया।
परिवाद पत्र के अनुसार परिवादी का मुख्य रूप से संक्षेप में कथन यह है कि परिवादी विपक्षी का एक किलोवाट का उपभोक्ता है, जो नियमित विद्युत बिलों का भुगतान करता रहा है। विपक्षी के प्रवर्तन दल द्वारा दिनांक 12.08.2011 को निरीक्षण रिपोर्ट तैयार किया गया तथा नोटिस दिनांक 23.08.2011 दिया गया, जिसमें परिवादी के विरूद्ध विद्युत चोरी का आरोप लगाते हुए 70227.50/-रू0 की मांग की गयी तथा विपक्षी द्वारा जांच रिपोर्ट में परिवादी के लोड को 4.010 किलोवाट दर्शाया गया, जो गलत है। परिवादी द्वारा कोई विद्युत की चोरी अथवा अनाधिकृत उपभोग नहीं किया जा रहा था। विपक्षी द्वारा उपरोक्त कारण से विद्युत विच्छेदन किया गया तथा उपरोक्त धनराशि की मांग की गयी। अत: क्षुब्ध होकर परिवादी द्वारा विपक्षी के विरूद्ध परिवाद जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रस्तुत करते हुए वांछित अनुतोष की मांग की गयी।
उपरोक्त तथ्यों से प्रथम दृष्ट्या यह स्पष्ट है कि प्रस्तुत प्रकरण विद्युत चोरी से सम्बन्धित है। अत: ऐसे मामले जो विद्युत चोरी से सम्बन्धित हैं, मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील नं0 5466/2012 (arising out of SLP No. 35906 of 2011), यू0पी0 पावर कारपोरेशन लि0 व अन्य बनाम अनीस अहमद में पारित निर्णय दिनांक 01.07.2013 के अनुसार उपभोक्ता फोरम के समक्ष चलने योग्य नहीं हैं। अत: जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश विधिसम्मत नहीं है, जो अपास्त किए जाने
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योग्य है।
तदनुसार प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्ता आयोग (प्रथम), आगरा द्वारा परिवाद संख्या-498/2011 मो0 आजाद बनाम टोरंट पावर लि0 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 04.11.2011 अपास्त किया जाता है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गयी हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित अपीलार्थी को यथाशीघ्र विधि के अनुसार वापस की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार)
अध्यक्ष
जितेन्द्र आशु0
कोर्ट नं0-1